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Saturday, July 16, 2016

Using Shisham Tree-शीशम वृक्ष का प्रयोग

Using Shisham Tree

Using Shisham Tree-शीशम वृक्ष का प्रयोग-

हर शहर या गाँव में सड़क के किनारे आपको आसानी से शीशम(shisham) का पेड़ देखने को मिल जाएगा लेकिन अगर आप इसके गुणों से अनजान है तो चलिए आज आपको इसके गुणों और प्रयोग से भी आपको अवगत कराते हैं ये किस काम आती है जानकर आपको हैरानी होगी आप इसके प्रयोग से कई बीमारियों से निजात पा सकते है-

क्या है इसके प्रयोग-

नीम के पत्ते,शीशम के पत्ते,सदाबहार के पत्ते को आपस मिला कर लेने से डायबिटीज की बीमारी से होने वाली शिथिलता भी दूर हो जाती है-

यदि त्वचा का ढीलापन है तो आप शीशम के पत्तों को पत्थर पे पीसे और लगाए त्वचा का ढीलापन जाता रहेगा-

कोई जहरीला कीड़ा काट ले और उसके काटने से यदि सूजन हो जाती है तो शीशम और नीम के पत्ते को पानी में उबाल कर उस पानी में नमक मिला कर सिकाई करे सूजन जाती रहेगी-

यदि शरीर में कही भी कोई गाँठ है इस शीशम के पत्तों को पीसकर लगाएं गाँठ धीरे-धीरे ख़त्म होगी अगर आप बिना पीसे सिर्फ पत्तों को तेल लगाकर उपर से गर्म करके पत्तों को बाँध ले तब भी गाँठ समाप्त हो जाती है-

गर्मी में जिन लोगों को अधिक प्यास की शिकायत होती है तो इसके पांच पत्तों को पीस ले और मिश्री मिला कर पिए ये आपको ठंडक देगी और बार-बार प्यास लगने की समस्या कम हो जायेगी-तथा पसीने से आने वाली बदबू से भी आपको निजात मिल जायेगी-

ये शीशम के पत्ते और मिश्री मिला शर्बत जिसको अधिक माहवारी आती है या पीरियड में दर्द की शिकायत है और रुक-रुक कर पेशाब आता है या फिर सफ़ेद पानी आता है उसके लिए भी ये शर्बत बहुत ही फायदेमंद है-

जिन माताओं-बहनों को कम दूध आता है शीशम के पत्ते पीस कर स्तन पे लगाएं इससे दूध पर्याप्त मात्रा में आने लगेगा-पशुओं में भी थनैला रोग में भी इसके पत्तों को लुगदी की तरह पीस कर लगाने से थनैला रोग जाता रहता है-

जिन लोगों की आँखों में लाली है या दर्द रहता है या फिर जलन होती है आप इसके पत्तों को पीस कर लुगदी बनाए और इस लुगदी को टिक्की की तरह बना कर आँख की पलकों पर रात को सोते समय बाँध ले सुबह आँखों की लाली जाती रहेगी-

यदि किसी को कैंसर की शिकायत है तो उसकी जो भी दवाएं कैंसर की चल रही हैं उसे चलने दें और साथ में शीशम के पेड के पत्तों का जूस भी दस से पंद्रह दिनों तक लें लें फिर उसके बाद शीशम के पत्ते को चबाना हर रोज शुरू करें - देखते देखते ही आपको कैंसर के मरीज के अंदर शानदार बदलाव आने दिखने लगेगें  और यह बीमारी खत्म हो जाती है-

दाद,खाज या त्वचा सम्बंधित किसी भी बिमारी में आप इसकी लकड़ी का तेल बना कर लगाए तथा नियमित मालिस करे इससे त्वचा सम्बंधित सभी रोग ठीक हो जाते है -

तेल बनाने के लिए आप किसी भी पुराने वृक्ष की लकड़ी लाये और उसे कूट ले फिर जितनी लकड़ी हो उससे चार गुना पानी लेकर धीमी आंच पे पकाए जब पानी एक चौथाई रह जाए तब उस बचे पानी के बराबर सरसों का तेल मिलाये और फिर धीमी आंच पे पकाए जब मात्र तेल रह जाए इसे किसी कांच की शीशी में भर कर रख ले -

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/07/using-shisham-tree.html

Wednesday, July 06, 2016

Why Should Ushapan-उषापान क्यों करे

Why Should Ushapan

Why Should Ushapan-उषापान क्यों करे-

आयुर्वेद में उषापान को अमृतपान कहा गया है अर्थात प्रात:काल उठने के बाद जल पीने को उषापान(Ushapan) कहते है रोगों को दूर करने में यह सरल-निशुल्क और सर्व-सुलभ उपचार है उषापान को जल चिकित्सा(Water therapy) भी कहते है आज चिकित्सक भी इसके महत्व को स्वीकार करते है -

उषापान पर वैज्ञानिक शोध भी किया जा चुका है निष्कर्ष के अनुसार -रात में नींद के समय लगभग छ: घंटे तक हर व्यक्ति के शरीर में कम हलचल होती है इस बीच में पेट द्वारा भोजन पचाकर उसका सारा रस सारे शरीर में पहुंचाने का काम बराबर चलता रहता है इस प्रक्रिया के साथ शरीर में नए कोष बनाने तथा पुराने कोषों को मल के रूप में विसर्जित करने का चयापचय(Metabolism) का क्रम चलता रहता है-

रात में शरीर की हलचल तथा शरीर में पानी के प्रवाह की कमी से जगह-जगह शरीर में विषैले तत्व एकत्रित हो जाते है प्रात: काल जागते ही शरीर में पर्याप्त मात्रा में एक साथ पानी पहुँचने से शरीर के आंतरिक अंगों की पूर्णत:धुलाई जैसी प्रक्रिया आरम्भ होती है जिससे सहज ही शरीर में विजातीय प्रदार्थ(Foreign substance) या विष(toxic) शरीर से बाहर निकल जाते है -यदि ये विजातीय तत्व या विष शरीर से बाहर नहीं निकल पाते है तो अनेक रोगों के कारण बन जाते है-ये बिषाक्त प्रदार्थ शरीर में पथरी(Calculus)या गाँठ के रूप में बन जाते है -उषापान से ऐसी बीमारियों को पनपने का अवसर ही नहीं मिलता है-

इसके प्राप्त परिणाम-

1- सिरदर्द,रक्तचाप,एनीमिया,संधिवात,मोटापा,स्नायुरोग,साइटिका,दिल की धड़कन,बेहोशी आदि से बचाव करता है-

2- कफ,खांसी,दमा,ब्राकाईटिस,टी.बी. की बीमारी में लाभ होता है-

3- मेनेजाइटीस,लीवर सम्बन्धी रोग,स्वप्नदोष आदि में लाभ-

4- हाइपर एसिडिटी ,अम्लपित्त,गैस सम्बन्धी रोग,में लाभ-

5- पेचिस ,गुर्दे की बिमारी,कब्जियत,डायबिटीज आदि में लाभ-

6- स्त्रियों की अनियमित माहवारी,प्रदर,गर्भाशय का कैंसर आदि समस्त रोगों की जड़ कब्ज है -

उषापान एक अचूक इलाज है तो फिर क्या सोच रहे है आज ये लेख पढ़ रहे है तो कल से ही शुरू करे और फ्री की सलाह से अपने जीवन को अप्रत्यासित रूप से स्वस्थ बनाए-

-Vasundhra Singh


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/07/why-should-ushapan.html

Thursday, June 30, 2016

Waves of Hypnosis Power-सम्मोहन की तरंग शक्ति

Waves of Hypnosis Powe

Mind Wave Power-मन के तरंग की शक्ति-

क्या आपने कभी अपने जीवन में अनुभव किया है कि आप खाली बैठे वक्त में किसी के बारे में गहराई से या तन्मयता(Immersion) से सोचते है और तभी अचानक आपके मोबाइल पर घंटी बज उठती है और आप जिसके बारे में ध्यान कर रहे थे उसी का फोन आ जाता है आप इसे सिर्फ एक संयोग समझ लेते है -आप  कहेगे जी हाँ - लेकिन इसका भी एक विज्ञान है आइये आखिर क्या है आपके शरीर से प्रवाहित होने वाली तरंगों(Waves) का राज-


प्रत्येक मानव प्राणी के अन्दर से हर समय सम्मोहन की तरंगें(Waves of hypnosis) प्रवाहित होती रहती है और ये तरंगें नेत्र और हाथ की उंगुलियों से अदृश्य रूप में निकलकर ब्रह्माण्ड की इथर तरंगों में मिलते हुए विश्व व्यापक बनी रहती है हमारे मुंख द्वारा उच्चारित भी प्रत्येक शब्द इस ब्रह्माण्ड(universe) स्थापित रहता है रेडियो,टी वी ,मोबाइल ध्वनी तरंग भी इसी का उदाहरण है आवश्यकता है सही माध्यम की जिनसे इन तरंगों को यथावत सुना जा सके -

इसी प्रकार मन से निकली हुई तरंग है जैसे ही आप किसी के बारे में गहन-तन्मयता से विचार और सोच को प्रकट करते है भले ही वो कितनी ही दूर स्थित हो आपकी मन तरंग ब्रम्हांड में संचरित होती हुई उस व्यक्ति के विचार और मन को आंदोलित करती है और उसे भी लगता है कि आप शायद उसे याद कर रहे है और अचानक मोबाइल से वो आपका हाल लेने को उत्सुक हो जाता है -बस आवश्यकता है गहन सोच और लगन की-

सम्मोहन भी एक विज्ञान है इसके द्वारा सही प्रयोग करके आप काफी लाभ ले सकते है बहुत सी बीमारियों मन स्थिति मनोरोग का निदान भी किया जा सकता है वास्तविक रूप से कहा जाए तो सम्मोहन ज्ञान एक ऐसी कला भी है जिसका जानकार व्यक्ति आपके अंदर के छिपे हुए तथ्य को भी जान सकता है आपका पूर्व जन्म भी देख सकता है चूँकि इस विध्या के दुरूपयोग की संभावना को देखते हुए जानकार व्यक्ति भी इसे किसी को देने में आना-कानी करता है आज के युग में लोगों में इर्ष्या की भावना बलवती है और किसी का अहित करने में भी संकोच नहीं करते है अत:गुप्त रूप से लोगों के लिए इस विध्या का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है -सिर्फ श्रेष्ठ लोगों को ही जानकार व्यक्ति इस विध्या को प्रदान करता है -

आपका शरीर भी शुद्ध विज्ञान है  आप इसे तरंग विज्ञान या एयर साइंस भी कह सकते हैं आपने मित्र को सोंचते हुए इच्छा बनाया चूँकि आपकी इच्छा में प्रबलता थी यह इच्छा तरंग ब्रह्माण्ड के तरंग के जरिए मित्र की तरंगों से जा टकराई और तब मित्र न चाहते हुए भी आपको फोन कर डालाता है  इससे स्पष्ट हो रहा है कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी और कभी भी इच्छानुसार अपने विचार को भेजा जा सकता है- प्राचीन समय में भारतीय ऋषि मुनि ऐसे कार्य आसानी से संपन्न कर लेते थे- इसे टेलीपैथी ज्ञान भी कहते हैं- इसमें किसी प्रकार का कोई चमत्कार नहीं है- हमने देखा है कई बार लोग सम्मोहन के अधकचरे ज्ञान के चलते अपनी आँखें तक ख़राब कर लेते हैं-वास्तविक सम्मोहन ज्ञान की जानकारी और गुरु निर्देशन से उच्चता को प्राप्त किया जा सकता है-

सूर्य त्राटक करने के चक्कर में कई लोगों ने अपनी आँखे तक खराब कर ली है इसका सही अभ्यास गुरु के निर्देशन में किया जाए तभी उचित होता है बिना बिना सही ज्ञान अथवा बिना मार्गदर्शक सूर्य त्राटक करना उचित विचार नहीं है-त्राटक का अर्थ है- किसी एक बिंदु पर एक टक लगातार देखते रहना सूर्य त्राटक उगते सूर्य की लालिमा से ही  आरम्भ करना उचित है. धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाते रहने से सफलता मिलती जाती है यदि अपने शरीर के साधारण तरंगों को असाधारण बना लेते हैं तो आप दुनिया के किसी भी स्त्री पुरुष को सेकेंडों में सम्मोहित कर सकते हैं. वैसे भी सम्मोहन शास्त्र कोई जादू या तंत्र मंत्र नहीं बल्कि यह शुद्ध तौर पर शरीर और मन का विज्ञान है-

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/07/waves-of-hypnosis-power.html

Sunday, June 26, 2016

Problem and Experience-समस्या और अनुभव

Problem and Experience

Problem and Experience-समस्या और अनुभव-

आज समय बदल गया है आवश्यकता(requirement) जीवन में इतनी बढ़ गई है कि सिर्फ पति के काम करने से गृहस्थी का चलना नामुमकिन सा होता जा रहा है इसी आवश्यकता पूर्ति के लिए पति-पत्नी दोनों का काम करना आवश्यक सा होता जा रहा है ख़ास कर बड़े शहरों में -

वैसे आज भी कई जगह महिलाओं के काम करने को हेय द्रष्टि से देखा जाता है हमेशा परिवार के सदस्यों को यही सोच लगी रहती है कि बाहर जा कर काम करने वाली महिला चरित्र हीन हो सकती है दूसरे पुरुष से सम्बन्ध बन सकते है लेकिन जहाँ तक मेरा विचार है कि ये गलत है - बहुत सी महिलाए बाहर काम पे जाती है और उनका चरित्र हमेशा उज्जवल ही रहता है -अपवाद रूप में सौ प्रतिशत गारंटी नहीं ली जा सकती है कि हर महिला सही है लेकिन कुछ प्रतिशत को तो देखते हुए सभी को इन नजरों से देखना उचित नहीं होगा -

यदि महिला का अपना चरित्र अच्छा है तो भले हजारों के बीच काम करे लेकिन उसके चरित्र पे कतई भी आंच नहीं आ सकती है लेकिन चरित्रहीन महिला तो घर में भी रह कर भी आपकी नाक कटवाने में कोई कसर नहीं रक्खेगी ये चरित्र संस्कार से बनता है -

समस्या(Problem) यहाँ ये है कि जब आवस्यकता की पूर्ति के लिए स्त्री-पुरुष दोनों काम करते है तो पति को भी अपनी पत्नी से सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है -आखिर काम तो आपकी पत्नी भी करती है -थकावट आना भी लाजिमी है -हाँ अगर पति चाहता है कि पत्नी काम न करे और आपका ईगो हर्ट होता है तो फिर आप मर्द बने और सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करे-किसी भी स्त्री को बेमतलब में बाहर काम करना अच्छा नहीं लगता है अगर सभी आवश्यकता उसका पति पूरा कर रहा है-

कामकाजी पत्नियाँ इस बात से त्रस्त है कि काम से लौटने के बाद उनका पति अपने आफिस के बॉस का गुस्सा उन पर उतारते है घर की समस्या है या आफिस की -बस प्यार एक ऐसी चीज है सामंजस्य एक अदभुत प्रयोग है इस्तेमाल की जाए तो सभी समस्या का समाधान मिल ही जाता है यदि पति पत्नी को काम पर जाने की इजाजत देता है तो फिर शंका को दिमाक से निकालना भी आवश्यक है वर्ना आपके अच्छे -खासे घर में तांडव होते देर नहीं लगेगी -

जब कोई व्यक्ति अपना काम करता है तो बिजनेस में फायदा या नुकसान उसके मन में आक्रोश भर देता है यही गुस्सा जब तक बाहर नहीं निकल जाता तब तक अंदर ही अंदर सुलगता रहता है इसको पति और पत्नी के बीच होने वाले झगड़ों की बहुत बड़ी वजह माना जाता है पति को जब अपना गुस्सा निकालने का दूसरा कोई रास्ता दिखाई नहीं देता है तो वह इसे अपनी पत्नी पर निकाल देता है वह पत्नी की छोटी-छोटी बातों में गलतियां निकालने लगता है और कुछ मामलों में तो बात मारपीट पर भी आ जाती है-

उन सभी पतियों को गुस्सा निकालने का कोई दूसरा रास्ता निकालना चाहिए क्युकि पत्नी को बार-बार प्रताड़ित करके आप सिर्फ अपना ही घर बर्बाद करते है -आपकी बाहर की समस्या का कोई भी प्रभाव आपके परिवार पे नहीं पड़ना चाहिए -समस्या(Problem) जीवन में हर व्यक्ति को है किसी की बड़ी तो किसी की छोटी हो सकती है जरुरत है आपके धैर्य और साहस की - आपके जीवन में अगर समस्या नहीं होगी और उससे आप निकलने का रास्ता नहीं तलासेगें तो जीवन में आप हमेशा अनुभवहीन ही रहेगे-

जीवन शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/06/problem-and-experience.html

Wednesday, June 01, 2016

Advertisement Network- विज्ञापन का नेटवर्क

Advertisement Network

Advertisement Network- विज्ञापन का नेटवर्क-

प्रस्तुत लेख में हम आज विज्ञापन(Advertisement) के बारे में कुछ चर्चा करने जा रहे है आज विज्ञापन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है लोगो की एक आवश्यकता के रूप में उभर कर आया है वास्तव में विज्ञापन के माध्यम से सभी कम्पनियां अपने प्रोडक्ट(Product) की मांग को बढ़ाने के लिए करती है सभी उत्पादक(Productive) विज्ञापन द्वारा उपभोक्ताओं(Consumers) को लुभाने का कार्य करते है मगर हमें सोचना ये है कि क्या सभी उत्पाद जो प्रचरित किये जाते है वो मापदंड(standard) के अनुकूल है या सिर्फ मायावी कुचक्र में फंसा कर मात्र भ्रमित करने का कार्य कर रहे है -

आज व्यावसायिकता(Professionalism) की दौड़ में इसका अवस्य ख्याल रखना होगा कि सिर्फ विज्ञापन देख कर और आँख बंद करके हमें खरीदना है -हम ये नहीं कहते है कि विज्ञापित वस्तुए आप मत लो -लेकिन आप ये क्यों मान लेते है कि जिस चीज का विज्ञापन हो रहा है वो सर्वथा आपके लिए हितकारी(beneficial) ही है -

अधिकांश रूप से विज्ञापनों में सिर्फ सही जानकारी न देकर सिर्फ उपभोक्ता को उल्लू ही बनाया जाता है और हो भी क्यों न हो -भारत ही ऐसा देश है जहाँ सब कुछ चलता है किसी को सोचने का समय नहीं है -लेकिन आपने सोचा है उत्पादन कर्ता तो अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए हर प्रयत्न करेगा-लेकिन आप क्यों नहीं सोचते है कि हमें क्या लेना है जो स्वास्थ के लिए लाभदायक हो - हर सीरियल हो फिल्म हो या सपोर्ट चैनल सभी पर दस मिनट का विज्ञापन तो आपको झेलना ही होगा -आखिर वो आपके लिए जिस सीरियल या फिल्म को आप तक पंहुचाने का कार्य करते है उनका भी पूरा खर्च उनको ही वहन करना है और ये पैसा आप तो देते नहीं -सिर्फ विज्ञापन कम्पनियां ही अपने विज्ञापन दिखाने के लिए देती है-

कुछ विज्ञापन तो इस प्रकार बनाए जाते है कि अगर आप उसका उपयोग नहीं करते है तो दुनियां के सबसे बड़े बेवकूफ है -जबकि इसका उल्टा है ऐसे विज्ञापन सिर्फ-और-सिर्फ आपको ही बेवकूफ बना रहे है-बड़े-बड़े स्टार,टी वी स्टार-को अपने प्रोडक्ट के लिए हायर करते है -और ये तो पता ही है सभी अभिनेता या स्टार धन कमाने की दौड़ में शामिल है -आपका क्या होगा या नहीं होगा इससे उनको कुछ लेना -देना नहीं है -

वैसे अधिकतर विज्ञापन नारियो को लेकर बनाये जाते है और कोई कोई विज्ञापन तो मर्यादा से बाहर भी होता है आज नारियों को हम जगत-जननी या माँ नहीं सिर्फ आकर्षण की वस्तु समझने की भूल जो कर बैठे है उसकी का दुष्परिणाम है जो विज्ञापन प्रदाता -महिलाओं को लेकर अधिकाँश: विज्ञापन का निर्माण करता है-सभी विज्ञापन परिवार का हर सदस्य देखता है और आपके बच्चे भी - अगर किसी बच्चे ने किसी अश्लील प्रचार को देख कर आपसे ये पूछ लिया -ये क्या होता है तो मज़बूरी में ही सही लेकिन आपको अपने ही बच्चे से झूठ बोलना होगा-

आज तो इस काम में ऑनलाइन शोपिंग की भी होड़ मची है अनेक-साईट आपको घर बैठे प्रोडक्ट उपलब्ध करा रही है लोक-लुभावन आफर के साथ -कोई -कोई एक की कीमत में दो देता है कोई दस प्रतिशत से लेकर अस्सी प्रतिशत का डिस्काउंट देता है -क्युकि उनको पता है आपके पास दिमाक तो है लेकिन दिमाक से सोचने का वक्त नहीं है -किसी प्रोडक्ट को अपनी लागत और मुनाफे को अत्यधिक रेट बता कर आपको डिस्काउंट देने का लोभ-लुभावन खेल चलता है और आप इस मायाजाल में उलझ जाते है -चलिए मान लेते है आप पे समय नहीं है और पैसा है -लेकिन आपके लिए हितकारी है या उसकी गुणवत्ता(Quality) है इसके लिए आप क्या करेगे?

आज विज्ञापन आवश्यकता है लेकिन जिस चीज का विज्ञापन हो रहा है और जो कह कर दिखाया जाता है पहले उस प्रोडक्ट को भी उसी हिसाब से जांचा-परखा जाना चाहिए -अतिश्योक्ति इतनी भी न हो कि अगर कोई क्लेम कर दे तो मुसकिल पड़ जाए-मान लो माउन्टेन ड्यू पीकर यदि कोई पहाड़ से कूदे तो कम्पनी उसकी मौत का हर्जाना कितना देगी-जितनी बार प्यास लगे कोका-कोला और पेप्सी पिए और जब आतें सड़ जाए तो कम्पनी कितना हर्जाना देगी-सैमसंग S 3 फोन सिर्फ स्मार्ट लोगों के लिए है बाकी सभी फोन बेवकूफ लेते है ?एक माह के डिटर्जेंट से आपको इतना सोना मिलेगा कि नौकरी की जरुरत नहीं पड़ेगी-आप लक्स कोजी बिग शॉट नहीं पहनेगे तो खुद को मर्द कहलाने का आपको कोई हक़ नहीं है -मेरा पापा रिवाइटल खाते थे अब क्या पूरी दुनियां को खिलाओगे -आपका बेटा बोर्नविटा नहीं पीता तो मंद्बुधि रहेगा ये गारंटी कम्पनी दे रही है -हंसी आती है विज्ञापन देख कर -किस तरह लुभावने तरीके से उल्लू बनाने का ठेका ले रक्खा है और आप भी किसी से कम नहीं आँख बंद कर विश्वाश कर लेते है-


हंसी तब आती है जब सबसे जादा पढ़े-लिखे लोग ही इस मायाजाल में फंसते है आपको प्रोडक्ट खरीदने से पहले उस प्रोडक्ट में कितनी सच्चाई है जानना आवश्यक है -

आज से कुछ वर्षो पहले जब विज्ञापन का प्रचार-प्रसार नहीं था लोग बाजार से सामान ले आते थे और दुकानदार पे ही भरोषा किया करते थे तब न तो इतनी मिलावट खोरी थी न इतनी धांधली थी हर व्यक्ति को कम मुनाफे में भी दुकानदार सामान देता था -आज तो इसके विपरीत है दुकानदार को किस तरह आपकी जेब से माल ढीला करवाना है इससे मतलब है जब से विज्ञापन का प्रचार हुआ है एक फायदा है कि बहुत सी वस्तुओं के दाम पहले से आपको पता होते है -बस आवश्यकता है विज्ञापन अश्लीलता युक्त न हो अतिश्योक्ति भरा न हो और दिखाए जाने से पहले -बताई गुणवत्ता के अनुकूल ही हो-

ऑनलाइन माल खरीदने पर बस इतना ही फायदा है आपको घर बैठे डिलेवरी है -लेकिन अगर वो किसी कारण खराब हो जाए या घाटियाँ किस्म का हो -तो बस कोरियर से आदान-प्रदान करते रहे- ऑनलाइन प्रोडक्ट जादा तर किसी ब्रांडेड कम्पनी के नहीं होते है इसलिए आपके शहर में उनकी रिप्लेसमेंट या सुधार की कोई एजेंसी नहीं होती है और वारंटी निकलने के बाद कोई प्रॉब्लम होती है तो फिर आप कम्पनी से सम्पर्क भी करते है तो इतने चार्ज होते है कि दूसरा प्रोडक्ट मिल जाए-यानि रफ-टफ यूज -अगर ब्रांडेड है और आपके शहर में एजेंसी है तो आपको अपने शहर की एजेंसी से ही लेना चाहिए-समस्या होने पर जा सके-

विज्ञापन दाताओं को विज्ञापन बनाते समय नैतिक मूल्यों और आदर्शो का पूरी तरह पालन करना चाहिए -झूठे और हानिकारक वस्तुओं को समाज के प्रति प्रस्तुत न करे -विज्ञापन में अश्लीलता का प्रदर्शन न करे-हमारा समाज ही व्यापारी का अंतिम सोपान है जब समाज स्वस्थ नहीं होगा तो व्यापारी कभी स्वस्थ नहीं हो सकता है - 

जीवन-शैली-


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Monday, May 30, 2016

How to Purify Water-जल को कैसे शुद्ध करे

Purify Wate

How to Purify Water-जल को कैसे शुद्ध करे-

कई लोगों के सवाल थे कि अगर हम RO का पानी नहीं पिए तो क्या करे-मेरा भी एक सवाल है अगर कोई जवाब दे से सके- तो अवश्य ही पोस्ट में नीचे जाकर कमेन्ट करे - "आज से पहले जब RO नहीं हुआ करता था तब क्या लोग आज से पहले स्वस्थ नहीं थे "

हमने अपनी पिछली पोस्ट में आपको बताया था -आज हम उसका जवाब इस पोस्ट में देने की कोशिश करते है जिन लोगो का सवाल था-

वास्तविकता ये है कि तर्क का कोई अंत नहीं होता है एक लाइन में कमेन्ट करके निकल जाना ये सिद्ध नहीं करता है कि आप का उत्तर तर्क संगत है अगर आप कही कमेन्ट करते है तो फिर तर्क करना जरुरी है तर्क बुरा नहीं ज्ञान बढाता है या तो आपको ज्ञान मिलेगा या फिर मुझे ज्ञान मिल जाएगा किसी एक को तो ज्ञान और भान दोनों होगा-


जल हमारे जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है भोजन के बिना आप अधिक से अधिक एक माह रह सकते है वो भी आपकी प्रतिरोधक शक्ति के उपर निर्भर करती है-लेकिन जल के बिना आप जादा से जादा 7 से 10 दिन ही रह सकते है इससे ये बात साफ़ है कि 'जल जीवन का आधार है' -जब ये जीवन का आधार है ये जल -तो फिर उस जल को पीने से क्या फायदा जिसमे कुछ भी शारीरिक लाभ के लिए बचा ही नहीं है -

आज जिस फिल्टर का प्रचार किया जाता है वो सिर्फ आप को भ्रमित करने मात्र है जादा तर फिल्टर बैक्टीरिया और दूषित प्रदार्थ के साथ -साथ शरीर को आवश्यक मिनिरल को भी समाप्त करते है -फ़िल्टर में ऐसा कोई पैमाना या यन्त्र नहीं लगाया जाता है कि वो मिनिरल जो आपके शरीर के लिए आवश्यक है उसे छोड़ देगा-

अब शुरू होता है यहाँ से आपका एक सवाल " फिर हम क्या करे या शुद्ध पानी कैसे पिए"

हमारा भी एक सवाल ये है आपसे कि- एक दिन में कितना पानी पीते है -जाहिर है कि आप दो -तीन लीटर ही पी सकते है वो भी सुबह से रात तक - तो क्या हम अपने शरीर की आवश्यकता के लिए देशी तरीके से दो-तीन लीटर पानी भी नहीं शुद्ध कर सकते है वैसे भी आप मिलावटी वस्तुओं का सेवन कर रहे है कोई भी इससे अछूता नहीं है-तो क्या जल जो हमारे जीवन की कार्य क्षमता के लिए आवश्यक है उसे भी शुद्ध और मिनिरल युक्त नहीं पियेगे-

जो लोग नहीं पीना चाहते है उनसे मेरा कोई तर्क नहीं है क्युकि ये शरीर आपका है कुछ भी खाए या पिए -इसमें हमारा कुछ नहीं जाता है - वैसे मुझे भी पता है फ़ोकट की सलाह किसी मतलब की नहीं होती है -जहाँ कंसल्टेंसी की फीस लगती है वो सलाह आपके काम की होती है फिर चाहे आराम हो या न हो-

आज आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ- एक बड़े बिजनेसमेन एक बार मेरे पास आये और बोले हम अपनी एक फैक्ट्री हिमाचल प्रदेश बददी में लगा रहे है आप उसका वास्तु देख ले मैने उनको कहा -सेठ जी मान लो पूरी तरह से वास्तु-शास्त्र की पद्धति से आपने फैक्ट्री लगा ली और फिर भी न चली तो आप किसको दोष देगे?

मगर पैसा जिसपे होता है उसकी प्रकृति भी थोड़ी बहुत जिद्दी हो जाती है वो तीस हजार रूपये खर्च करके अपनी दोनों फैक्ट्री का वास्तु-दोष किसी और वास्तुकार से कराया - उदघाटन हुआ और एक साल में ही फैक्ट्री बंद करनी पड़ी-आप साधारण तरीके से ही भगवान् का पूजन कराये और काम करे बस नित्य ईश्वर की आराधना ही आपके बिगड़े काम बनाती है -इन्शान तो बस अपना उल्लू सीधा करता है -

अब मुद्दे की बात पे आता हूँ कि फिर शुद्ध जल के लिए क्या करे-क्या आपको पता है कि तुलसी में खाद्य वस्तुओं को विकृत होने का एक विशेष गुण होता है -जब सूर्य ग्रहण होता है तो आपके बुजुर्ग खाने को विकृत होने से बचाने के लिए खाने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते रखवा दिया करते थे -तुलसी मृत व्यक्ति के पास भी क्यों रक्खी जाती है -तुलसी का घर में पौधा लगाने से क्या वैज्ञानिक कारण है -जहाँ तुलसी का पौधा होता है आस-पास पांच सौ फुट की जगह की वायु इससे प्रभावित होती है -अब नए पक्छिमी सभ्यता के संस्कारी लोग इस बात को नहीं मानेगे -लेकिन वैज्ञानिक लोग मानते है -आज काफी मात्रा में दवाइयाँ भी तुलसी से निर्माण हो रही है-जहाँ जिस घर में तुलसी का पौधा है मलेरियां,प्लेग,क्षय के कीटाणु तो अपने आप नष्ट हो जाते है -

पूजन में भी भगवान् विष्णु को तुलसी डाल प्रिय है चरनामृत में भी बिना तुलसी प्रसाद बनाने का कोई विधान नहीं है अर्थात तुलसी आपके स्वास्थ-प्रद जीवन के साथ आपके पीने वाले जल को भी शुद्ध करने की छमता रखती है-

कैसे स्वच्छ करे जल को -

चार लीटर जल में आप 25-30 पत्तियां ताज़ी जल में डाल दे थोड़ी ही देर में आपका जल शुद्ध हो जाता है और आप उसे छान कर पी सकते है ये आप स्वच्छ जल में भी कर सकते है आपका जल एक अनोखी शक्ति से भर जाता है ये जल साधारण ही नहीं आपको कैंसर जैसी भयानक बिमारी से भी सुरक्षित रखता है-

यदि आप कही है और आपको तुलसी उपलब्ध नहीं है तो आप पानी को उबाल कर पीये- उबले पानी में कीटाणु नष्ट हो जाते है मिनिरल नहीं-लेकिन जल को लगभग 20 मिनट अवश्य ही उबाले-

एक और विशेष बात आपको बताता हूँ ताजे जल की अपेक्षा बासी और ढका हुआ जल आपके लिए कैसे जादा सुरक्षित है -बासी जल में कीटाणु तले में बैठ जाते है और आप इसमें फिटकरी चूर्ण या सहजन के बीज का चूर्ण मिला दे फिर आप इसे दूसरे दिन छान कर पिए वास्तव में ये कीटाणु रहित जल होगा और बिना मिनिरल गवाएं हुए-

अगर आपको बिलकुल ही गन्दा पानी मिल रहा है तो देशी विधि कारगर है -एक कच्चे मटके में लकड़ी के कोयले का मोटा-चूर्ण डाल दे दूसरे मटके में थोड़ी सी रेत डाल दे और उसके तली में बारीक छेद कर के एक कपडे की बत्ती लगा दे कोयले वाले मटके को उपर रख कर उसमे पानी डाल दे -जल उपर से होकर नीचे रेत की मटकी में आएगा और रेत की मटकी से आपके बर्तन में -इससे न ही मिनिरल नष्ट होगा और आपको शुद्ध पानी भी पीने को मिल जाएगा -

ब्लीचिंग पाउडर (जिसमें क्लोरीन होता है) पानी को कीटाणुरहित करने के लिए काफी उपयोगी होता है-इससे सभी तरह के बैक्टीरिया मर जाते हैं- घर में भी इसका इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है-घर में इस्तेमाल के लिए यह गोलियों या द्रव के रूप में मिलता है- ये गोलियॉं या घोल पानी में डाले जाते हैं-एक गोली 20 लीटर पानी के लिए पर्याप्त है- इसके 30 मिनट बाद पानी इस्तेमाल किया जा सकता है- इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत हो सकती है-

ये शरीर आपका है और आप इसे कैसे रखना है आप पे निर्भर है मेरा किसी से कोई तर्क नहीं है -

आप जल शुद्ध है या नहीं इसकी जाँच के लिए क्या करे हम आपको अगली पोस्ट में बताने का प्रयास करेगे-

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/how-to-purify-water30.html

How to Purify Water-जल को कैसे शुद्ध करे

How to Purify Water

How to Purify Water-जल को कैसे शुद्ध करे-

कई लोगों के सवाल थे कि अगर हम RO का पानी नहीं पिए तो क्या करे-मेरा भी एक सवाल है अगर कोई जवाब दे से सके- तो अवश्य ही पोस्ट में नीचे जाकर कमेन्ट करे - "आज से पहले जब RO नहीं हुआ करता था तब क्या लोग आज से पहले स्वस्थ नहीं थे "

हमने अपनी पिछली पोस्ट में आपको बताया था -जिसका लिंक ये है आज हम उसका जवाब इस पोस्ट में देने की कोशिश करते है जिन लोगो का सवाल था-


वास्तविकता ये है कि तर्क का कोई अंत नहीं होता है एक लाइन में कमेन्ट करके निकल जाना ये सिद्ध नहीं करता है कि आप का उत्तर तर्क संगत है अगर आप कही कमेन्ट करते है तो फिर तर्क करना जरुरी है तर्क बुरा नहीं ज्ञान बढाता है या तो आपको ज्ञान मिलेगा या फिर मुझे ज्ञान मिल जाएगा किसी एक को तो ज्ञान और भान दोनों होगा-


जल हमारे जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है भोजन के बिना आप अधिक से अधिक एक माह रह सकते है वो भी आपकी प्रतिरोधक शक्ति के उपर निर्भर करती है-लेकिन जल के बिना आप जादा से जादा 7 से 10 दिन ही रह सकते है इससे ये बात साफ़ है कि 'जल जीवन का आधार है' -जब ये जीवन का आधार है ये जल -तो फिर उस जल को पीने से क्या फायदा जिसमे कुछ भी शारीरिक लाभ के लिए बचा ही नहीं है -

आज जिस फिल्टर का प्रचार किया जाता है वो सिर्फ आप को भ्रमित करने मात्र है जादा तर फिल्टर बैक्टीरिया और दूषित प्रदार्थ के साथ -साथ शरीर को आवश्यक मिनिरल को भी समाप्त करते है -फ़िल्टर में ऐसा कोई पैमाना या यन्त्र नहीं लगाया जाता है कि वो मिनिरल जो आपके शरीर के लिए आवश्यक है उसे छोड़ देगा-

अब शुरू होता है यहाँ से आपका एक सवाल " फिर हम क्या करे या शुद्ध पानी कैसे पिए"

हमारा भी एक सवाल ये है आपसे कि- एक दिन में कितना पानी पीते है -जाहिर है कि आप दो -तीन लीटर ही पी सकते है वो भी सुबह से रात तक - तो क्या हम अपने शरीर की आवश्यकता के लिए देशी तरीके से दो-तीन लीटर पानी भी नहीं शुद्ध कर सकते है वैसे भी आप मिलावटी वस्तुओं का सेवन कर रहे है कोई भी इससे अछूता नहीं है-तो क्या जल जो हमारे जीवन की कार्य क्षमता के लिए आवश्यक है उसे भी शुद्ध और मिनिरल युक्त नहीं पियेगे-

जो लोग नहीं पीना चाहते है उनसे मेरा कोई तर्क नहीं है क्युकि ये शरीर आपका है कुछ भी खाए या पिए -इसमें हमारा कुछ नहीं जाता है - वैसे मुझे भी पता है फ़ोकट की सलाह किसी मतलब की नहीं होती है -जहाँ कंसल्टेंसी की फीस लगती है वो सलाह आपके काम की होती है फिर चाहे आराम हो या न हो-

आज आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ- एक बड़े बिजनेसमेन एक बार मेरे पास आये और बोले हम अपनी एक फैक्ट्री हिमाचल प्रदेश बददी में लगा रहे है आप उसका वास्तु देख ले मैने उनको कहा -सेठ जी मान लो पूरी तरह से वास्तु-शास्त्र की पद्धति से आपने फैक्ट्री लगा ली और फिर भी न चली तो आप किसको दोष देगे?

मगर पैसा जिसपे होता है उसकी प्रकृति भी थोड़ी बहुत जिद्दी हो जाती है वो तीस हजार रूपये खर्च करके अपनी दोनों फैक्ट्री का वास्तु-दोष किसी और वास्तुकार से कराया - उदघाटन हुआ और एक साल में ही फैक्ट्री बंद करनी पड़ी-आप साधारण तरीके से ही भगवान् का पूजन कराये और काम करे बस नित्य ईश्वर की आराधना ही आपके बिगड़े काम बनाती है -इन्शान तो बस अपना उल्लू सीधा करता है -

अब मुद्दे की बात पे आता हूँ कि फिर शुद्ध जल के लिए क्या करे-क्या आपको पता है कि तुलसी में खाद्य वस्तुओं को विकृत होने का एक विशेष गुण होता है -जब सूर्य ग्रहण होता है तो आपके बुजुर्ग खाने को विकृत होने से बचाने के लिए खाने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते रखवा दिया करते थे -तुलसी मृत व्यक्ति के पास भी क्यों रक्खी जाती है -तुलसी का घर में पौधा लगाने से क्या वैज्ञानिक कारण है -जहाँ तुलसी का पौधा होता है आस-पास पांच सौ फुट की जगह की वायु इससे प्रभावित होती है -अब नए पक्छिमी सभ्यता के संस्कारी लोग इस बात को नहीं मानेगे -लेकिन वैज्ञानिक लोग मानते है -आज काफी मात्रा में दवाइयाँ भी तुलसी से निर्माण हो रही है-जहाँ जिस घर में तुलसी का पौधा है मलेरियां,प्लेग,क्षय के कीटाणु तो अपने आप नष्ट हो जाते है -

पूजन में भी भगवान् विष्णु को तुलसी डाल प्रिय है चरनामृत में भी बिना तुलसी प्रसाद बनाने का कोई विधान नहीं है अर्थात तुलसी आपके स्वास्थ-प्रद जीवन के साथ आपके पीने वाले जल को भी शुद्ध करने की छमता रखती है-

कैसे स्वच्छ करे जल को -

चार लीटर जल में आप 25-30 पत्तियां ताज़ी जल में डाल दे थोड़ी ही देर में आपका जल शुद्ध हो जाता है और आप उसे छान कर पी सकते है ये आप स्वच्छ जल में भी कर सकते है आपका जल एक अनोखी शक्ति से भर जाता है ये जल साधारण ही नहीं आपको कैंसर जैसी भयानक बिमारी से भी सुरक्षित रखता है-

यदि आप कही है और आपको तुलसी उपलब्ध नहीं है तो आप पानी को उबाल कर पीये- उबले पानी में कीटाणु नष्ट हो जाते है मिनिरल नहीं-लेकिन जल को लगभग 20 मिनट अवश्य ही उबाले-

एक और विशेष बात आपको बताता हूँ ताजे जल की अपेक्षा बासी और ढका हुआ जल आपके लिए कैसे जादा सुरक्षित है -बासी जल में कीटाणु तले में बैठ जाते है और आप इसमें फिटकरी चूर्ण या सहजन के बीज का चूर्ण मिला दे फिर आप इसे दूसरे दिन छान कर पिए वास्तव में ये कीटाणु रहित जल होगा और बिना मिनिरल गवाएं हुए-

अगर आपको बिलकुल ही गन्दा पानी मिल रहा है तो देशी विधि कारगर है -एक कच्चे मटके में लकड़ी के कोयले का मोटा-चूर्ण डाल दे दूसरे मटके में थोड़ी सी रेत डाल दे और उसके तली में बारीक छेद कर के एक कपडे की बत्ती लगा दे कोयले वाले मटके को उपर रख कर उसमे पानी डाल दे -जल उपर से होकर नीचे रेत की मटकी में आएगा और रेत की मटकी से आपके बर्तन में -इससे न ही मिनिरल नष्ट होगा और आपको शुद्ध पानी भी पीने को मिल जाएगा -

ब्लीचिंक पाउडर (जिसमें क्लोरीन होता है) पानी को कीटाणुरहित करने के लिए काफी उपयोगी होता है-इससे सभी तरह के बैक्टीरिया मर जाते हैं- घर में भी इसका इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है-घर में इस्तेमाल के लिए यह गोलियों या द्रव के रूप में मिलता है- ये गोलियॉं या घोल पानी में डाले जाते हैं-एक गोली 20 लीटर पानी के लिए पर्याप्त है- इसके 30 मिनट बाद पानी इस्तेमाल किया जा सकता है- इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत हो सकती है-

ये शरीर आपका है और आप इसे कैसे रखना है आप पे निर्भर है मेरा किसी से कोई तर्क नहीं है -

आप जल शुद्ध है या नहीं इसकी जाँच के लिए क्या करे हम आपको अगली पोस्ट में बताने का प्रयास करेगे-

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/how-to-purify-water.html

Saturday, May 28, 2016

How to Make Vegetable Theplas-कैसे बनाए वेजीटेबल थेपला

Vegetable Theplas


How to Make Vegetable Theplas-कैसे बनाए वेजीटेबल थेपला-

अपने कही प्रकार के पराठे खाए होंगे आलू के पराठे जेसे मेथी के पराठे यह सभी के घर में बनता है लेकिन आज हम आपको वेजीटेबल थेपला बनाना बताउगी जो खाने में Delicious(स्वादिष्ट)  है -


वेजीटेबल थेपला बनाने की साम्रगी-

गेंहू का आटा- 2 कप 
मैदा-1/2  कप 
मलाई  - एक कप 
दूध  - 1/2 कप 
हींग  - एक चुटकी 
बारीक़ कटी मेथी - 1/2 कप 
बारीक कटी  पालक- 1/2 कप
अदरक ,हरीमिर्च ,लहसुन का पेस्ट-  एक छोटा चम्मच 
कद्दूकस की लोकी -1/4 कप
नमक - स्वाद अनुसार 
जीरा -एक छोटा चम्मच 
अजवायन - एक छोटा चम्मच
सौंफ - 1/4 छोटा चम्मच 
तेल - सेकने के लिए


बनाने की विधि -  

सबसे पहले हम आटे और मैदा में कटी मेथी ,पालक  और सभी साम्रगी जैसे मलाई दूध हींग और अदरक ,मिर्ची ,लहसुन का पेस्ट भी आटे में डाल दीजिये फिर कद्दूकस की हुई लौकी नमक  जीरा सौफ़ आदि डाल कर आटे को गूँथ ले अब इससे सूती कपड़े से ढक कर लगभग 10 से 15 मिनिट के लिए रख दीजिये -फिर आटे की छोटी -छोटी लोई बनाकर इसे अब बेल लीजिये फिर इससे तवे पर धीमी आच पर चिकनाई लगा कर सेंक लीजिये आपका वेजिटेबल थापेला तैयार है अब आप इसे गरमा- गरम चटनी के साथ लीजिये-

जीवन शैली- 


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/how-to-make-vegetable-theplas.html

Friday, May 27, 2016

Sattu Ki Chatpati Kachouri-सत्तू की चटपटी कचौड़ी

Sattu Ki Chatpati Kachouri
Sattu Ki Chatpati Kachouri-सत्तू की चटपटी कचौड़ी-

आज हम आपको सफर में ले जाने के लिए चटपटी सत्तू की कचौड़ी बनाना बतायेगे जो खाने में बहुत चटपटी और मजेदार है यह कचौड़ी कई दिन तक ख़राब नहीं होती आप इससे कहीं भी सफ़र में भी ले जा सकते है और घर में भी बना कर रख सकते है-

सामग्री-      

मैदा -2 कप 
तेल- एक बड़ा चम्मच मोयन के लिए 
सत्तू - डेढ कप 
भूने तिल- एक चम्मच 
भुनी मूंगफली के दाने- 20 ग्राम 
तिल- 10 ग्राम 
पिसी चीनी- एक चम्मच 
राई-1/4 छोटा चम्मच 
हींग- छोटा चम्मच 
लाल मिर्च पाउडर- एक छोटा चम्मच 
सौंफ - एक चुटकी  
अमचूर- एक छोटा चम्मच 
नमक- स्वाद के अनुसार


विधि - 

सबसे पहले मैदा में एक छोटा चम्मच तेल डालकर मोयन करके उसमे एक चुटकी नमक डाल कर आटे को गूँथ ले- फिर एक तरफ कढाई में मूंगफली के दाने भून ले और तिल को भी भून ले-फिर सत्तू को धीमी आंच में भून लीजिये-अब मूंगफली और तिल को दरदरा पीस ले -फिर सत्तू में पिसी मूंगफली तिल और लाल मिर्च पाउडर अमचूर पाउडर हींग छोटा चम्मच भुना हुआ और नमक स्वाद अनुसार डाल दीजिये-  

भरावन -

अब आटे की छोटी -छोटी लोई ले कर बेले अब उसमे उपर बनाई गई सभी सामग्री इन लोइयों में डाल कर बंद करके फिर से बेल ले- इसी प्रकार सभी लोईयाँ बना कर बेल ले फिर इसे गर्म तेल में सुनहरा होने तक तले-फिर आप इसे गरमा-गरम सर्व करे -

जीवन-शैली -




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Saturday, May 21, 2016

Are You Troubled By Sweat-क्या आप पसीने से परेशान है

Troubled By Sweat

Are You Troubled By Sweat-क्या आप पसीने से परेशान है-

बहुत से लोगों की परेशानी है कि उनको पसीना(Sweat) बहुत आता है कुछ लोग जरा सा काम करते ही पसीने से तर-बतर हो जाते है और सबसे बड़ी परेशानी तो ये है कि कई विध्यार्थी तो लिखते समय उनके हाथों से इतना पसीना आता है कि वो अपने इस पसीने से इतना परेशान हो जाते है कि सही रूप से परीक्षा भी नहीं दे पाते है जादा पसीना(Sweat) आना मुख्यतः लो-ब्लड प्रेशर,हापर-हाइड्रोसिस और तनाव ही है वैसे सच कहा जाए तो इसका कोई परमानेंट इलाज तो नहीं है परन्तु कुछ उपाय आपको इससे राहत अवश्य ही दिला सकता है-

हम आपको इस समस्या से काफी हद तक निजात दिलाने का उपाय बताते है-

1- सबसे पहले थोडा गुनगुने पानी में आप खाने वाला सोडा(Baking Soda) डाले और अपने पसीने-दार हाथो को कुछ मिनटों के लिए उसमे डुबाये आप देखेगे कि हाथों को घोल से निकालने के बाद कई घंटों तक आपके हाथों को पसीना नहीं आएगा -विध्यार्थी परीक्षा में जाने से पहले इस प्रयोग को अपना कर जा सकते है -

2- शराब(alcohol) जी हाँ पीने के लिए नहीं प्रयोग करे बस उपचार के लिए आप इस शराब में रुई को डुबो कर अपनी हथेलियों पर कुछ देर रगड़ें आपका सारा पसीना सूख जाएगा और कुछ समय के लिए आपको Sweat(पसीना) नहीं आएगा जादा कस के नहीं रगड़ना है वर्ना आपकी त्वचा रुखी भी हो सकती है -

3- प्रत्येक घर में आलू(potato) का प्रयोग किया जाता है आप कच्चे आलू को काट कर जहाँ भी जादा पसीना आता है रगड़े इस प्रयोग से पसीना आना कम हो जाता है -

4- जिन लोगों के चेहरे पर पसीना(Sweat) जादा आता है उनको अपने चेहरे पर खीरा(Cucumber) काट कर उसके स्लाइस को हल्के हाथों से रगड़ना चाहिए या फिर आप खीरे का रस भी अपने चेहरे पर लगा सकते है ऐसा करते रहने से कुछ समय बाद पसीना आना कम हो जाता है-

5- जिन लोगों के पैर के तलवों में अत्यधिक मात्रा में पसीना आता है उनको कुछ देर पानी में थोड़ी सी फिटकरी(Alum) डाल कर अपने पैरों को डुबा कर रखना चाहिए इससे आपके कुछ दिन प्रयोग से पैरों का पसीना आना कम होने के साथ-साथ पैरों की दुर्गन्ध में भी लाभ होता है -

6- थोड़े से पानी में दो-तीन टी-बैग डाले और उसमे अपनी हथेलियों को कुछ समय के लिए डुबा कर रक्खे ये प्रयोग आपके हाथों का पसीना आने के लिए प्राकृतिक रूप से लाभदायक है-

7- बाजार में बिकने वाला कच्चा बैंगन(brinjal) भी आप के पसीने को रोकने का कारगर उपाय है आप इसका रस निकाल कर हथेली और पैरों के तलवे पर लगाए आपका पसीना निकलना बंद हो जाएगा -

8- किचन में प्रयोग होने वाली अरहर यानी तुअर दाल(Toor dal) 20 ग्राम +एक चम्मच नमक+आधा चम्मच सोंठ को आपस में मिला कर शुद्ध सरसों के तेल में छौंक लगाए और फिर इसे पीस ले ताकि एक पावडर बन जाए अब आप इस पावडर से जहाँ से पसीना आता है वहां इससे मालिस करे इस प्रयोग से कुछ दिन करते रहने से पसीने का आना लगभग बंद हो जाता है-

9- आप यदि टमाटर का रस पीते है तो काफी हद तक आप पसीने को काबू कर सकते है ये ठंडा होता है और आपके शरीर को भी ठंडा रखने में सहायक है-

10- साबुत मूंग को हल्का भूनकर उसमें एक चम्मच बिना उबला दूध मिलाकर पेस्ट बनाकर फेस पर लगाने से पसीना नहीं आता है  मूंग आपके फेस की नमी को सोखती है जिससे पसीना निकलना बंद हो जाता है-

विशेष-

क्या आप जानते है कि मेडिटेशन(ध्यान) करने से आपके कई सारे रोग दूर हो सकते हैं अत्‍यधिक पसीना तभी निकलता है जब आप स्‍ट्रेस में हों या आपको किसी बात की बेचैनी हो रही हो -लेकिन योग और ध्‍यान से आप अपने स्‍ट्रेस के लेवल को कम कर के पसीने को रोक सकते हैं-

अंडर-आर्म के लिए-

बहुत से लोगों के अंडर-आर्म की तीव्र गंध होती है आप इसे कम करने के लिए निम्न प्रयोग आजमाए-

सामग्री-

जौ का आटा- एक चम्मच 
चन्दन पाउडर- आधा चम्मच 
कैलामाईन पावडर- आधा चम्मच
मिल्क- आधा चम्मच 
शहद- आधा चम्मच 

उपरोक्त सभी चीजो को मिला कर दही या फिर गुलाब जल में मिला कर हफ्ते में दो बार लगाए ये आपके अंडर-आर्म की गंध के साथ-साथ स्किन के कालापन को भी दूर करता है -

चहरे के लिए-

मुल्तानी मिटटी- एक चम्मच 
पिसा चन्दन -एक चम्मच 
ग्लिसरीन- चार-पांच बूंद 

इसमें से चुटकी भर सामग्री को लेकर गुलाब जल में घोल ले और नहाने से पहले अपने फेस पर इस पैक को लगाने से स्किन साफ़ चमक दार और कोमल रहती है तथा चेहरे का पसीना भी नहीं आता है -

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/are-you-troubled-by-sweat.html

Monday, May 16, 2016

What is RO water for health-क्या RO का पानी स्वास्थ के लिए है

What is RO water for health

आज एक फैशन सा चल निकला है लोग ये सोच कर RO का पानी इस्तेमाल करते है कि हम बीमारियों से बचे रहेगे जिसे देखो आज RO घर में लगवाने की होड़ में दौड़ रहा है क्या कभी सोचा है कि RO का पानी पीने से हमें क्या मिल रहा है यही तो बात हमारे हिन्दुस्तान में है लोग एक दूसरे की देखा-देखी में कम्पटीशन में हर वो काम करते चले जाते है जिससे आप लोगो को ये कह सके कि हमारे पास भी है आइये जानते है RO के पानी की पूरी सच्चाई -



वैसे जब हमारे देश में जब RO का चलन नहीं था तो क्या लोग जादा बीमार हुआ करते थे -आप पिछले सारे आंकड़े उठा के देख ले तो आपको पता हो जाएगा आज लोग जादा बीमार है -ये सब एक षड्यंत्र के तहत है विदेशी कम्पनियों का विज्ञापन के जरिये फैलाया गया माया जाल है और हम भेडचाल की तरह अनुगमन करते जा रहे है बस आपको कोई दिमाक में ठूंस-ठूंस कर भरने वाला एक व्यक्ति चाहिए-आपने खुद ब खुद को बीमार करने का ठेका जो लिया है तो कोई भला क्या कर सकता है -आप अपने जीवन में आधुनिकता की दौड़ में इतने खो चुके है कि आपको सच्चाई भी अब कडवी ही लगती है-

विज्ञापन अधिकतर उस चीज का किया जाता है जो लगभग घटिया किस्म का हो और फिर जिसे दिखा-दिखा या समझा -समझा कर आपके दिमाक में इतना भर दिया जाता है कि आपको वो चीज सबसे उपयुक्त ही लगने लगे -कोल्ड ड्रिंक का विज्ञापन दिखा-दिखा कर आपके बच्चो की जुबान तक पर रटा दिया जाता है -

आज स्टेशनों दुकानों में भी फ़िल्टर पानी बेचा जाता है और आप ये सोच कर पीते है हम बीमार नहीं होंगे -क्या आपको पता है कि पानी में बहुत से मिनरल होते है और जब ये काटरेज फ़िल्टर से पास होता है तो बहुत सारे मिनरल तो ख़त्म हो जाते है B-12 उसमे से समाप्त हो जाता है जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक था-

आपके घर पर जो भी 10वी पास सर्विस इंजिनियर आते हैं, उनसे पूंछिये कि कितने टीडीएस का जल पीना चाहिए तो बोलेंगे 50 टीडीएस का- जो उनको सिर्फ रटाया गया है उनसे पूछे मनुष्य के लिए पानी में कौन-कौन से मिनरल चाहिए तो कहेगे जी ये तो पता नहीं है मगर धडल्ले से रो बेचे जा रहे है कई बंद बोतलों का पानी भी चेक किया गया लेकिन किसी में 20 टीडीएस तक का पानी नहीं मिला-वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर 500 टीडीएस तक का पानी सहन करने की छमता रखता है परंतु RO में 18 से 25 टीडीएस तक पानी की शुद्धता होती है जो कि शारीर के लिए बहुत ही घातक हैं-



एशिया और योरोप में तो रो के पानी पे प्रतिबंध भी लगाया जा चुका है भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ सिर्फ शरीर के लिए घातक चीजो को बेचने की आजादी है -रो के पानी में 92 से 99 प्रतिशत मनुष्य के लिए जरुरी मैग्नीशियम और कैल्शियम तो नष्ट हो जाते है -

क्या आपको पता है कि RO से पानी बनाने के लिए 50 प्रतिशत पानी को हम ऐसे ही बेकार कर देते है दो लीटर पानी से एक लीटर RO WATER तैयार होता है हम सभी लोगो के लिए 7 से 7.5 पी.एच और 200 से 250 टी.डी.एस तथा 50 हार्डनेस वेल्यु का पानी होना चाहिए - कोई भी RO वाटर क्वालिटी मेन्टेन ही नहीं करता है ये सिर्फ आपको साफ़ पानी देता है बोतल में बंद पानी की कहानी भी कुछ अलग है उनकी टी.डी.एस बस 10 के लगभग ही होती है पी.एच बढाने के लिए तथा मिनरल को मेन्टेन रखने के लिए अलग से केमिकल का उपयोग होता है-

जब भी आप बाहर का या नल का पानी पीते है कुछ ही दिनों में आपके पेट में दर्द रहने लग जाता है क्योंकि आपके सिस्टम को RO पानी की आदत पड़ी हुई है और आपकी प्रतिरोधक छमता कम हो चुकी है जो लोग RO का पानी पीते है वो लोग गाँव या छोटी बस्ती में रहने वालो की तुलना में देखे तो आप पायेगें कि उनके आंतो.की प्रतिरोधक छमता आपकी प्रतिरोधक छमता से जादा है-

आप ये विडिओ से समझे-https://youtu.be/8Fy-GtZBB8w


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/what-is-ro-water-for-health-ro.html

Saturday, May 14, 2016

Further attention is married dock-शादीशुदा है तो आगे से ध्यान रक्खे

Further attention is married dock

'एक कहावत है शादी वो लड्डू है जो नहीं खाता वो भी पछताता है जो खाता है वो भी पछताता है' -ख़ैर "अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत"

जब तक शादी नहीं होती है आप किसी दोस्त के घर जाएँ तो अगर उसके घर में कोई जवान बहन इत्यादि है तो आपको अंदर आने को नहीं कहता है बेचारा आपको बाहर से ही बाहर निपटा देता है इसलिए आपको एक लाइसेंस मिले इसके लिए शादी करना भी आवश्यक है -



आपको शादी के बंधन में बाँधने और उकसाने वाले तरह-तरह की सलाह भी देते है क्युकि लोग किसी की ख़ुशी से भला कहाँ खुश होते है आपकी फक्कड अलमस्त जिन्दगी से उनको जलन होती है इसलिए उन पे जो बीत रही है वो चाहते है आप भी उसका थोडा मजा ले-

चलो अब बात करते है कि कि शादी कर भी ली है तो कोई बुराई नहीं है बस अब आप तैयार हो जाए कुछ कामों को अपनी जिन्दगी में ढालने के लिए-

सबसे पहले यदि आप अपनी पत्नी को खुश देखना चाहते है तो एक बात का विशेष ध्यान रक्खे -कुछ भी हो जाए आप भूल कर भी अपनी पत्नी के मायके वालो की बुराई कदापि  न  करे -अगर शांति पूर्वक जिन्दगी बिताना है तो उल्टे अपनी ससुराल की तारीफ़ ही करते रहे-

शादी के बाद लगभग सभी बाते कामन होती है जो आपको बड़े -बूढ़े-बुजुर्ग-भाभी या women(महिलाओं) से जानने को मिल जाती है लेकिन कुछ बाते है जो आपको ही समझना पड़ेगा तो आइये अब चलते है कुछ और सीक्रेट बातें जिनको आपको अपनी लाइफ में अवश्य करना चाहिए -

इस पोस्ट में हम आपको पति और पत्नी दोनों के लिए नुस्खे प्रदान कर रहे है-अच्छा लगे तो रख ले और अगर बुरा लगे तो हमें वापस कर दे-

शादी के बाद सबसे पहले आप दो पाटों के बीच पिसने को तैयार हो जाए क्युकि पत्नी शादी के बाद आप पे अपना पूरा हक़ जताती है आखिर क्यों न हो अग्नि के फेरे लेकर आपने जो वचन दिए है और आपकी माँ जिसने आपको नव माह तक अपने गर्भ में रक्खा और उसके बाद आपका पालन-पोषण किया है तो वो भी अपना हक़ अपने बेटे से कैसे हटा ले -बस आपको कुछ नहीं करना है दोनों को पटा(समझा) कर रखना है अगर गलती से भी आपने अपनी माँ का पक्ष ले भी लिया है -तो तैयार हो जाइए मार्केट से गिफ्ट लाके पत्नी को देने की -क्युकि गिफ्ट देखकर पत्नी का गुस्सा कुछ हद तक कम अवस्य हो जाएगा-

लड़कियां भी ध्यान दे- आपको भी अगर आराम दायक शान्ति प्रिय जीवन बिताना है तो अपनी सासू माँ को अवश्य ही पटा कर रक्खे अगर आप एक छत के नीचे रहना चाहती है तो रिश्ता लड़के की माँ से बना कर रखने से आपको फायदा ही मिलने वाला है अगर आपने लव-मैरिज की है तो इस गलत-फहमी में न रहे कि पति सिर्फ आपकी ही बात मानेगा -शादी के पहले भले ही आपका होने वाला जीवन साथी आपकी हर अदा पर और काम करने की काबलियत पर सौ बार फिदा होता रहा हो पर- शादी के बाद उसे अपना घर और खाना सब कुछ बिल्कुल वैसा चाहिए जैसा उसकी मां करती रही है इसलिए आपको पति को खुश रखना है तो अपनी सासू माँ से ही सब कुछ सीखना पड़ेगा-

अब तक आप ने जो किया आपके माँ-बाप ने ये सोच कर करने दिया था कि बहू के आने पर खुद-ब-खुद सुधार लेगी- ये जिम्मेदारी सिर्फ बहूँ की समझते है -मगर कभी सोचा है जो काम आपके माँ-बाप इतने सालों में नहीं कर सके तो कल की आई बहूँ को क्या कोई "सम्मोहन ज्ञान" आता है उसे भी तो समझने में साल-दो साल लग ही जायेगे और अगर पत्नी में गुणों का अभाव हुआ तो भी वो आपको आपके ही हाल पे छोड़ देगी-तो आप अपने जीवन साथी के साथ नई जीवन की शुरुवात करे -आप ही खुद को जब सोचेगे तभी बदल पायेगे-

आप कलह से और फिजूल खर्ची से बचना चाहते है तो आपको अपनी कमाई का पूरा हिसाब-किताब अपनी पत्नी को देना चाहिए इससे दो फायदे होगे-पहला आपकी फिजूल-खर्ची पे अंकुश लगेगा और दूसरा आपकी पत्नी कभी भी आप को शक की नजरों से नहीं देखेगी-हाँ एक बात अवश्य ध्यान रक्खे पत्नी को अगर आप पैसे देते है तो भूल-कर भी आप अपनी पत्नी से हिसाब मांगने की जुर्रत भी न करे वर्ना परिणाम घातक ही होगा-

पत्नियों को शादी के बाद एक बात का और भी ख्याल रखना चाहिए कि भले आप पहले मंगेतर रही हो लेकिन अब लेकिन अब आप मंगेतर नहीं है पहले आपके पार्टनर आपका ख्याल अवश्य रखते रहे हो आपकी छोटी-से-छोटी बातों के लिए आपका हर काम करने में अपना अहोभाग्य समझते हो लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला है पति किचन में आपका हाथ नहीं बँटाने वाला है उस काम को आपको ही करना है और वो भी लाचीज व्यंजन के साथ -भले आपका पति अगर किचन में जाकर जला-भुना भी बना लाये तो उसे कोसे नहीं बल्कि आप उनका अहसान ही समझे-

आपकी पत्नी भले ही हर बात अपनी माँ से शेयर करती हो कि दिन भर आप क्या क्या करते है आपके घर वाले उसे क्या-क्या ताने या बाते सुनाते है लेकिन उसकी गलतियों की बाते आप अपनी माँ से शेयर करे तो भूल कर भी ये गलती मत करना वर्ना आपके घर में ही कुरुक्षेत्र बनने वाला है-

आप लड़की थी और अब आप पत्नी बन कर ससुराल आ गई है यहाँ लड़के के माता पिता आपके अपने है लेकिन आप अपने माता-पिता को सिर्फ मेहमान की तरह ही बुलाये और मेहमान नवाजी के बाद जल्द ही बिदा करने की सोचे -क्युकि हो सकता है आपके नए परिवार में उनको कुछ खामियां नजर आ जाए और फिर आप तो समझ सकती है मुंह है कुछ न कुछ आपके कान भरने से आपका मस्तिष्क चेंज हो सकता है और ये भी हो सकता है कि आपका भरा पूरा परिवार उनकी बातों से कष्ट में आये - सुने भले ही लेकिन उनकी बातो को लागू करने की भूल कदापि न करे -

आप अपने फैसले को पति पर थोपने का प्रयास न करे आप सिर्फ सलाह दे कि "हम सोचते है आप ऐसा करते तो जादा अच्छा होता लेकिन आपने भी  कुछ सोच समझ कर फैसला लिया होगा" ये बात कह कर आप उनको सोचने पे मजबूर कर सकती है और हो सकता है वो अपना फैसला बदल लें-

वैसे पतियों को भी एक बात का ख्याल रखना चाहिए कि यदि आपकी पत्नी रूठ गई है तो आप ही पहल करिए मनाने का और हो सके तो सॉरी आप ही पहले कहें-

मुझे जो सलाह देनी थी हमने दे दी बाकी फैसला तो आप ही करेगे क्युकि हम जानते है "शुरू-शुरू में हर व्यक्ति मर्द ही होता है लेकिन फिर भी वो आखिर में पत्नी का ही गुलाम बन जाता है"

जीवन-शैली 


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/further-attention-is-married-dock.html

Friday, May 13, 2016

Lifestyle-Treatment Of Heel Pain-एड़ी में दर्द का इलाज

Treatment Of Heel Pain

आमतौर पर आजकल कई महिलाओं और पुरुषो में एड़ी के दर्द की समस्या पाई जा रही है चलने -फिरने में काफी तकलीफ होती है पुरुषो को चाहिए की वे अच्छे कम्पनियों के अपने पैरों के हिसाब से टेस्टेड जूते पहने तथा लडकियों और महिलाओं को चाहिए की हाई हील की सैंडिल या चप्पल पहनते वक्त ध्यान रक्खे कि उनके पैरों के हिसाब से आराम-दायक और सुटेबिल हो -जादा ऊँचे हील आपके पैरों को नुकसान-दायक साबित हो सकते है -



यदि आपका दर्द के कारण चलना-फिरना मुश्किल हो गया है तो आप निम्नलिखित उपाय करे-

लेप बनाए-

सरसों के तेल में थोड़ी हल्दी को पकाकर उसमे आप नीम्बू +प्याज+नमक डालकर पेस्ट बनाए और रात को सोने से पहले आप इसे अपनी एडियों पे लगा ले कुछ दिन लगातार करने से आपको एडियों के दर्द से छुटकारा मिल जाएगा-

ठण्डा गर्म सेंक -

एक बर्तन में आप अपने लिए गुनगुना पानी करे और एक बर्तन में ठण्डा पानी रख ले तथा फिर आप एक गीली तौलिया को सर पे लपेटे और किसी ऊँची जगह बैठ कर अपने पैरों को बदल-बदल कर ठन्डे व गर्म पानी में बारी-बारी से रक्खे ठन्डे पानी में यदि आप तीन मिनट रक्खे तो गर्म पानी में पांच मिनट रक्खे नित्य ये प्रयोग करने से आपके एड़ी के दर्द को धीरे-धीरे आराम होता जाएगा और फिर सब कुछ नार्मल हो जाएगा-

एड़ी के दर्द होने पर क्या खाए-

1- आप अपने भोजन में आंवला, सेव, टमाटर, पत्तागोभी, कच्चा पपीता, आलू, ककड़ी और तोरई को शामिल करें- इसके साथ आप गुग्गुल का भी इस्तेमाल कर सकते है-

2- एड़ियों के दर्द से निजात पाने के लिए अपने भोजन में अधिक से अधिक अदरक का इस्तेमाल करे अदरक खून को साफ़ करके पतला भी करता है - 

3- पिण्ड खजूर को आप पोदीना के साथ मिलाकर चटनी की तरह सेवन करें-

4- मेथी -20 ग्राम +20 ग्राम ईसबगोल+ 20 ग्राम अजवाइन+20 ग्राम कलौंजी -इन सबको पीसकर चूर्ण बनाकर एक कांच की शीशी में रख ले तथा सुबह एक चम्मच खाली पेट गुनगुने पानी से इसका सेवन कुछ दिन करे-इस उपाय से आपके एड़ी के दर्द में निश्चित लाभ हो जाएगा ये नुस्खा आजमाया हुआ है-

5- ऐलोवरा को छीलकर इसका 50 ग्राम गूदा खाली पेट खाएं ये भी एड़ी के दर्द में लाभदायक है-

6- एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक चम्मच दूध के साथ एक चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर सेवन करें-

7- एलोवेरा+अदरक और काला तिल को मिलाकर गर्म करे और इसको एड़ी पर लगाए-

जीवन -शैली 


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/lifestyle-treatment-of-heel-pain.html

Friday, May 06, 2016

Consider carefully Flrting-फ्लर्टिंग करे सोच समझ कर

Consider carefully Flrting

आपने कुछ लड़कियों को कहते हुए देखा होगा कि -क्या हुआ अगर ऑफिस नया है पर थोड़ी बहुत flirting(फ्लर्टिंग) की जा सकती है अब ऐसी सोच रखने वाली लड़कियों को संभलने की जरूरत है क्योंकि फ्लर्टिंग करने से आप तरक्की तो कर सकती हैं पर आप किसी का विश्वास नहीं जीत सकती है अगर आपको लगता है कि ऑफिस में थोड़ी-बहुत फ्लर्टिंग से कोई नुकसान नहीं है तो इस बात पर आप एक बार पुन: विचार कीजिए-


आपके कार्यस्थल पर फ्लर्टिंग यानी हल्की-फुल्की flirt(इश्कबाजी) कुछ महिलाओं को आगे बढ़ने में मदद बेशक कर सकती है लेकिन ऐसी महिलाओं पर उनके सहयोगी भरोसा नहीं करते है हालांकि महिलाओं का आकर्षण उन्हें थोड़ी ज्यादा तवज्जो दिला सकता है लेकिन अगर वे कार्यस्थल पर इश्कबाजी करती हैं  तो उन्हें ज्यादा भरोसे के योग्य नहीं माना जाता है-

सहयोगियों के बीच आपके लिए अविश्वास की भावना आगे चल कर नुकसान दायक साबित हो सकती है महिलाओं को flirt(इश्कबाजी) जैसे शब्द से दूर रहना चाहिए क्योंकि समाज महिलाओं को यह हक नहीं देता है कि वो इश्कबाजी जैसी बातों में अपना समय बर्बाद करें-अगर महिलाओं के flirt(इश्कबाजी) करने से वो तरक्की तो करती हैं पर किसी का विश्वास नहीं जीत पाती है -

पुरूषों के ऊपर भी यही नियम लागू होना चाहिए- पुरूष भी इश्क बाजी करके तरक्की कर सकते हैं पर किसी का विश्वास नहीं जीत सकते हैं पुरुषों के साथ शायद ऐसा नहीं होगा क्योंकि इश्क बाजी ना करने के नियम केवल महिलाओं के लिए होते हैं पर यह भी सच है कि ऑफिस काम करते समय सिर्फ अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ना कि इधर-उधर ध्यान रखना चाहिए-


प्रेम या दांपत्य संबंधों के मामले में युवा पीढी की सोच में एक नया बदलाव नजर आ रहा है आज की शिक्षित और आत्मनिर्भर युवा स्त्री को अपनी व्यक्तिगत आजादी इतनी पसंद है कि वह उसे किसी भी कीमत पर- यहां तक कि प्यार पाने के लिए भी खोना नहीं चाहती है -

Wife of the previous generation(पिछली पीढी की स्त्री) की तरह वह प्यार में अपना सर्वस्व त्यागने को तैयार नहीं है अब उसका स्वतंत्र व्यक्तित्व है उसकी अपनी पसंद-नापसंद, रुचियां और इच्छाएं हैं उसे अपनी पसंद का साथी चुनने की पूरी आजादी है ऐसी स्थिति में उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है उसके पास अपने आप को बदलने की कोई वैसी मजबूरी भी नहीं है- जैसी कि उसकी पिछली पीढी की स्त्रियों की हुआ करती थी कि एक बार किसी पुरुष के साथ शादी या प्रेम के बंधन में बंध जाने के बाद उसके पास अपने साथी अनुरूप खुद को ढालने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता था-

आज वक्त के साथ स्थितियां तेजी से बदल रही हैं- ऐसा नहीं है Modern woman(आधुनिक युवती) अपनी शर्तो पर प्रेम करती है और अपने प्यार की खातिर खुद को बदलने के लिए जरा भी तैयार नहीं है आज भी प्रेम के प्रति उसका समर्पण कम नहीं हुआ है- फर्क सिर्फ इतना है कि आज उसकी जीवन स्थितियां उसके अपने नियंत्रण में हैं वह जिससे प्यार करती है उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है लेकिन वह अपनी Personal freedom(निजी स्वतंत्रता) को बरकरार रखना चाहती है इसलिए उसे प्रेम या दांपत्य संबंध के मामले में भी थोडे-से पर्सनल स्पेस की जरूरत महसूस होती है वह जिससे प्यार करती है उसका Caring(केयरिंग) होना तो उसे अच्छा लगता है-

यदि आफिस में आपका बॉस आपसे फ्लर्टिंग करता है तो ये जरुरी भी नहीं है कि आप वहां स्थाई कर्मचारी के रूप में रहेगीं आप से मन भर गया तो नई खोज में वो फिर से किसी और की तलाश कर सकता है और तब आपके सहयोगी भी आप से किनारा कर सकते है -इसलिए सोचे समझे और फिर आगे कदम बढाए-

हमेशा फ्लर्टिंग नुकसान दायक रही हो ऐसा हमारे कहने का उद्देश्य नहीं रहा है कभी -कभी ये फ्लर्टिंग कुछ लोगो के लिए लाभदायक भी साबित होती है लेकिन यदि आप शादी-शुदा नहीं है तो ये फ्लर्टिंग आपके जीवन में आपको जीवन साथी चुनने में सहायता भी करता है आप किसी से निकटता बढ़ा कर उसके बारे में गहराई से जान सकती है और फिर अपने जीवन में उसे आने दे या आप वापस मुड जाए इसके लिए आपको ये फायदेमंद भी है -


सबसे पहले अपने साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव को सबसे ज्यादा अहमियत दे -आप बहुत गहराई से अपने साथी को समझे उसके परिवार से भी निकट सम्बन्ध स्थापित करे जब आप परिवारिक गहराइयों में जाकर समझ ले तभी रोमांस को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है ऐसे लोग फ्लर्टिंग के दौरान बहुत जल्दी कामयाब होते हैं इन्हें खुद पर भरोसा होता है और बहुत जल्दी किसी रिश्ते की अहमियत को पहचान लेते हैं यही फ्लर्टिंग का ईमानदार तरीका है-

जीवन-शैली-


from जीवन-शैली http://www.jeevanshaeli.com/2016/05/consider-carefully-flrting.html